Smriti Diwas – स्मृति-दिवस – 2018

“जननी” यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार स्वतः उमड़ पड़ता है और मनो-मस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र में डूब जाता है।

31 मई, 2018 को उदया की जननी डाॅ कनक त्रिपाठी मैम की पुण्य तिथि स्मृति दिवस पर पूरा उदया परिवार उनकी स्म्तियों के समुद्र में डूबा रहा। अतिथि श्री शिव प्रताप शुक्ला, वित राज्य मंत्री ने उदया परिवार के साथ उदया की जननी को श्रद्वांजलि दिया। विद्यालय के अध्यापकों श्री राजीव पोरवाल, श्रीमती माधुरी दूबे, विद्यार्थियों देवेश, सोनिल और प्रियांशु ने उदया की जननी के प्रति भाषण और कविता के रूप में अपनी भावनाओं से व्यक्त किया। विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया और गरीब बच्चों को किताबें भेंट की गई। उदया की जननी ने अपनी रौशनी से सब कुछ रौनक किया है, उनकी स्मृतियों की रौशनी हमारे हृदय में सदैव जलती रहेगी।

Poem by Priyanshu Sahay (Class 12)

जादुई मूरत

पॅंहुच न पाया जब,
खुदा खुद हर जगह,
तब उसने कर दिया,
एक अनोखी दास्ताॅं।

मतलब से बनी इस दुनिया में,
प्यार से न रहे कोई अजाॅं,
इसलिए हर एक के लिए भेजा
इसने एक सुंदर और प्यारी माॅं।

परेशानियों की बेड़ियों से बंधकर भी,
हमें सिखाती है खुलकर जीना,
जाने किस जादू से,
कर देती है हर मुश्किल आसाॅं।

दीपक सा जलकर जिसने
हमारे जीवन को रोशनी दान।
ममतर की मूरत को पूजकर ही,
हम बनेगें एक अच्छे इंसान।

उसके लिए में सिर्फ प्यार ही प्यार है
जाने किस गुल्लक में करती है इतना प्यार जमा?
माॅं एक शब्द में ही
बसा है ये सारा जहाॅं।

प्रियांशु सहाय ( कक्षा १२ )

Poem by Priyanshu Sahay (Class 12)

मेरे पापा

जिंदगी के एक वीरान मोड़ पर
सूरज मेरे सिर पर था,
फिर अचानक से मुझ पर,
एक ठंडा-सा छाया आया।

मैने पीछे मुड़कर देखा,
वो खड़े थे मेरे पापा,
ईश्वर की अनमोल देन,
जिसने ऊॅंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया।

मुॅंह फुलाकर बैठा था मैं,
तो घोड़ा बनकर मुझे मनाया
बचपन की हर जिद को
चाॅंद खिलौनो से पूरा किया।

टी.वी. की हर एक धुन
उनके कदमों से दब जाती है,
उनके रहते मेरे पास
मुश्किल आने से घबराती है।

पिता से है नाम मेरा,
उन्होने ही आज मुझे बनाया,
सुपरहीरो से भी बढ़कर हैं,
मेरे लिए ”मेरे पापा“

प्रियांशु सहाय ( कक्षा १२ )